#विषय - पुरूषार्थी बनता पुरषोत्तम
# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता
दुख दर्द से नहीं घबराता ,
हर संकट से वो टकराता ।
हमेशा आगे बढ़ता जाता,
सच्चा पुरूषार्थी वही कहलाता।
मान मर्यादा का हमेशा रखता ध्यान,
वो ही पाता जग में सम्मान।
धर्म की खातिर जो लड़ता,
देश कौम के लिए मरता है।
सच्चा पुरुष पुरूषार्थी जीवन जीता ,
हर पल हर दम,
देश धर्म के लिए जीता है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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