# नमन मंच 🙏🙏🙏
# साहित्य संगम संस्थान जम्मू & कश्मीर इकाई
# दिनांक - 31/03/2021
# दिन - बुधवार
# विषय - ईमानदार
# शीर्षक - ईमान की खायेगा
# विधा - छंदमुक्त कविता
ईमान की खायेगा,
सदा तृप्ति रहेगा,
चिंता फिक्र से ,
हमेशा निवृत्त रहेगा,
ईमानदारी का मानता हूँ,
अब कोई मोल नहीं है,
बेईमानों का अब ,
बोलवाला है,
सब समझते हैं,
ईमानदार ही,
बस भोला भाला है,
बेईमानों की चतुराई,
कहीं काम न आएगी,
ईश्वर के दरबार में,
सिर्फ शर्मीदगी दिलवाएंगी,
ईमानदार ही सम्मान,
पाता है,
ईश्वर को हमेशा,
अपने निकट पाता है ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें