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बुधवार, 17 मार्च 2021

ओ मेरी माँ

# नमन मंच🙏🙏🙏 

# साहित्य बोध जम्मू कश्मीर इकाई

# दिनांक- 11/05/2021

# दिन- मंगलवार

#विषय- माँ

#विधा - स्वैच्छिक


ओ मेरी माँ, ओ मेरी माँ , 

सबसे सुंदर , सबसे न्यारी , 

लगती सबसे प्यारी है, 

ओ मेरी माँ.......... 

 पुचकारती है,  दुलारती है, 

प्यार से डांटती है, 

ओ मेरी माँ......... 

दिल की अच्छी है, मन की सच्ची है, 

हर पल प्यार लुटाती है, 

ओ मेरी माँ....... 

मेरा हर दुख , अपने पर ले लेती है, 

मेरे हर सुख का, कारण बनती हैं, 

ओ मेरी माँ........ 

मेरे मन की, हर बात समझती, 

जान लेती है, मेरे मन की हर बात, 

ओ मेरी माँ..................... 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू कश्मीर ,जम्मू



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