# नमन मंच🙏🙏🙏
# साहित्य बोध जम्मू कश्मीर इकाई
# दिनांक- 11/05/2021
# दिन- मंगलवार
#विषय- माँ
#विधा - स्वैच्छिक
ओ मेरी माँ, ओ मेरी माँ ,
सबसे सुंदर , सबसे न्यारी ,
लगती सबसे प्यारी है,
ओ मेरी माँ..........
पुचकारती है, दुलारती है,
प्यार से डांटती है,
ओ मेरी माँ.........
दिल की अच्छी है, मन की सच्ची है,
हर पल प्यार लुटाती है,
ओ मेरी माँ.......
मेरा हर दुख , अपने पर ले लेती है,
मेरे हर सुख का, कारण बनती हैं,
ओ मेरी माँ........
मेरे मन की, हर बात समझती,
जान लेती है, मेरे मन की हर बात,
ओ मेरी माँ.....................
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू
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