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गुरुवार, 18 मार्च 2021

बचपन

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार बिहार इकाई

# दिनांक - 05/07/2021

# दिन - सोमवार

#विषय - बचपन

# विधा - स्वैच्छिक -छंदमुक्त कविता

कभी हंसता, 

कभी रोता है । 

बचपन ऐसे ही , 

व्यतीत होता है। 

माँ का आंचल ही, 

संसार लगता हैं । 

माँ की लोरी, 

 लगती बहुत प्यारी। 

दिल करता सुनते रहे, 

जिंदगी सारी। 

खिलौनों से, 

होता है रिश्ता। 

हर अपना, 

 लगता है फरिश्ता। 

दादा दादी का, 

 खूब मिलता प्यार। 

शरारतें करने में, 

हमेशा रहता ध्यान। 

सबको उलझाए रखते , 

अपने काम। 

गलती करने पर , 

मुंह छिपाना । 

जीभ निकालकर, 

 दोस्तों को चिढ़ाना। 

आगे पीछे घूमता, 

 सारा परिवार । 

जात पात की न होती, 

कोई बात । 

सब मिलकर, 

खेलते साथ। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू कश्मीर ,जम्मू










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