# नमन मंच 🙏🙏🙏
# हिंदी साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई
# दिनांक - 15/03/2021
# दिन - सोमवार
# विषय - प्रकृति
# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता
फल फूल जीव जंतु,
प्रकृति का अनुपम उपहार
नदी ,नालों ,झरनों की धारा
स्वर करती अति प्यारा
पेड़ पौधों की छाया
दुख सारा भूलाया
फूलों की भीनी भीनी खुशबू से
महकाता सारा संसार
फलों का मीठा मीठा स्वाद
भरता चित में उल्लास
प्रकृति ईश्वर की छाया
हमेशा इसने माँ सा,
प्यार लुटाया।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह ,
जम्मू कश्मीर, जम्मू
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें