# हिंदी साहित्य संगम संस्थान
# दिनांक - 21/03/2021
# दिन - रविवार
# विषय - कर्म ही भाग्यविधाता है
# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता
कर्म ही भाग्यविधाता है,
यही सबको सफल बनाता है।
जात पात का कोई काम नहीं,
महान कर्म ही ,महान पुरुष बनाता है।
नीच कर्म ही नीच बनाता है,
मनुष्य भाग्य क्यों दोष लगाता है।
वर्ण, कुल का नाम काम नहीं आता,
जो कर्म करता उसका फल पाता हैं।
समय गुजरने पर पछताता है,
पछताना ही भाग्य बन जाता।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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