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शुक्रवार, 12 मार्च 2021

नयन निहारें तुम्हें

# नमन मंच 🙏🙏🙏
# नव साहित्य परिवार
# दिनांक - 13/03/2021
# दिन - शनिवार
# विषय - नयन निहारें तुम्हें
# विधा - स्वैच्छिक 

नयन निहारें तुम को प्रियतम, 
कब पाऊँगी दरस तुम्हारा । 
पल पल बिरहा मुझे सताए , 
कांटों की सेज सा चुभता जाए। 
क्या करू प्रियतम जो तुम रीझ जाओ, 
अपना सुंदर दरस एक क्षण ही दिखाओ। 
संसार के भोगों  का नहीं कुछ मोल , 
तेरा नाम है रत्न अनमोल। 
हर घड़ी तेरा नाम ध्याऊँ, 
बिना देखा कैसे जी पाऊँ। 
एक लक्ष्य एक की मन में आस, 
मन में लग रही तेरे दर्शन की प्यास। 
नयनों की प्यास  कब  प्रीतम बुझाओगे, 
कब अपना दरस दिखाओगे । 

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह 
जम्मू कश्मीर ,जम्मू


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