# नमन मंच 🙏🙏🙏
# साहित्य बोध उतर प्रदेश इकाई
# दिनांक - 20/05/2021
# दिन - गुरुवार
# विषय - आस्था
# विधा - लघुकथा
आस्था का संबंध दिल से है । राधिका नित्य मंदिर माथा टेकने जाती है और वहाँ जाकर पूजा करती और भगवान को लडडू का भोग लगाती है । उसके घर के बाकी सदस्य नास्तिक विचारों के है । राधिका मंदिर जा रही थी माँ ने रोक लिया और राधिका से कहने लगी, "क्या दिया तुम्हारे भगवान ने हमें बाप तुम्हारा चारपाई पर पड़ा है और भाई पढ़ लिखकर भी बेरोजगार है, अगर तुम्हारे भगवान में शक्ति है तो स्वस्थ करे तुम्हारे बाप को और भाई को नौकरी प्रदान करें । "
राधिका थोड़ी देर माँ की तरफ देखती रही और माँ से कहने लगी, " माँ भगवान के घर देर है अंधेर नहीं हैं, पापा भी ठीक हो जाएंगे और भाई को नौकरी भी मिल जाएगी आप ईश्वर पर विश्वास रखें। " बेटी की आस्था देखकर माँ का हृदय भी पिघल गया और राधिका को मंदिर जाने की आज्ञा दे दी ।
आस्था के चरम सीमा पर पहुँच चुकी राधिका की आस्था रंग लाई, उसके भाई को किसी निजी कंपनी में पंद्रह वेतनमान वाली नौकरी मिल गई। अब घर की आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा, अब राधिका के पापा ने भी चलना फिरना शुरू कर दिया।
राधिका के घर के सभी सदस्यों ने अब मंदिर जाना शुरू कर दिया। यह सब राधिका की अथाह आस्था का चमत्कार था जिसने उसे कभी टूटने और मायूस नहीं होने दिया। इतनी मुश्किलों के होने के बावजूद उसने मंदिर जाना नहीं छोड़ा और अपने विश्वास को ईश्वर पर बनाएं रखा।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू
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