# नमन मंच 🙏🙏🙏
# नव साहित्य परिवार
# दिनांक - 25/03/2021
# दिन - बृहस्पतिवार
# विषय - हम और हमारी नैतिक जिम्मेदारियां
# विधा - स्वैच्छिक- छंदमुक्त कविता
हम जिम्मेदारियों से बचते,
दूसरों को जिम्मेदार ठहराते,
कर्तव्य निभाने के समय,
मुहं मोड़ निकल जाएगें
नदी, नालों में फैककर गंदगी
दोष दूसरों पर लगाते
अपने कर्तव्यों से विमुख होकर
दूसरों को कर्तव्य का पाठ पढ़ाते
अपनी नैतिक जिम्मेदारी कब निभा पाएंगे ।
निर्धन की निर्धनता देखकर
दया भाव का दिखावा कर
सरकार पर दोष लगाकर
नैतिक जिम्मेदारी नहीं निभा पाते ।
धर्म के नाम पर वोट मांगकर,
कुर्सी की लालसा ,
नेता होने की नैतिक जिम्मेदारी ,
कब निभा पाएंगे।
रोड पार करते बजुर्ग को देख
आगे ना बढ़ कर
अपनी नैतिक जिम्मेदारी नहीं निभाता।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर ,जम्मू
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें