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# दिनांक - 05/07/2021
# दिन - सोमवार
# विषय -
# विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता
जो दिन बीत गया
वापिस नही आता है
नादान ही उसका शोक मानता
बीता हुआ वक़्त
नई सीख सीखता
नया इतिहास रचने के लिए
बुद्धिमान हमेशा आगे बढ़ता जाता ।
जो बीत गयी सो बात गयी
उसको भूल जाना अच्छा
बीते हुए वक़्त से
कभी कोई पूर्ण नहीं होती इच्छा।
जीत थी या हार
जीवन के लिए पाठ थी
उसके लिए खुशी या दुख मनाना
व्यर्थ में समय गंवाना है
जो बीत गया लौट कर ना आएंगे
नासमझ ही
अपना कीमती वक़्त गंवायेगा
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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