# नमन मंच 🙏🙏🙏
# साहित्य बोध मंच
# दिनांक - 16/03/2021
# दिन - मंगलवार
# विषय - दगा/फरेब/धोखा
# विधा - छंदमुक्त कविता
दूसरों को दिखावा करके दिखाना,
धोखा ही तो है ।
सेवा के नाम पर ,
खुद का नाम प्रचारित करना,
धोखा ही तो है।
हिंदी के विकास की बात करना,
भाषण अग्रेजी में देना,
धोखा ही तो है।
धर्म पर दंगा फसाद फैलना,
खुद को समाज सेवी कहलाना,
धोखा ही तो है।
रिश्तों की मर्यादा न समझना,
गिले शिकवे दिल में रखना,
धोखा ही तो है ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू
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