# नमन मंच 🙏🙏🙏
# साहित्य संगम संस्थान जम्मू & कश्मीर इकाई
# दिनांक - 30/03/2021
# दिन - मंगलवार
# विषय - दुविधा
# शीर्षक -
# विधा - छंदमुक्त कविता
मन की दुविधा का बुरा प्रभाव
काम रूक जाते, लग जाते साल
आत्मशक्ति का करती ये हनन
मन करता रहता अपने मनन
दुविधा में पड़कर ,
बन जाता कठपुतली
आम खा जाते सभी,
रह जाती गुठली
समय अपना व्यर्थ गंवाता
जीवन के अंत में,
बहुत पछताता
काम जो करने आया
दुविधा में फंसा ,
कर नहीं पाया
अमूल्य जीवन व्यर्थ गंवाया।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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