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सोमवार, 29 मार्च 2021

दुविधा

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान जम्मू & कश्मीर इकाई

# दिनांक - 30/03/2021

# दिन - मंगलवार

# विषय - दुविधा

# शीर्षक - 

# विधा -  छंदमुक्त कविता

मन की दुविधा का बुरा प्रभाव

काम रूक जाते, लग जाते साल

आत्मशक्ति का करती ये हनन

मन करता रहता अपने मनन

दुविधा में पड़कर ,

बन जाता कठपुतली

आम खा जाते सभी,  

रह जाती गुठली

समय अपना व्यर्थ गंवाता

जीवन के अंत में, 

बहुत पछताता

काम जो करने आया 

दुविधा में फंसा ,

कर नहीं पाया 

अमूल्य जीवन व्यर्थ गंवाया।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

जम्मू, जम्मू कश्मीर 





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