# नमन मंच 🙏🙏🙏
# साहित्य संगम संस्थान गुजरात इकाई
# दिनांक - 26/03/2021
# दिन - शुक्रवार
# विषय - अभिमान
# विधा - कविता
भारत का अभिमान वीर सपूत बढ़ाते है
देश की रक्षा की खातिर कुर्बान हो जाते
बेटियां मान अभिमान बढाती मायक़े का
ससुराल में प्यार की महक फैलाती
देश का अभिमान होते वो नागरिक
जो देश के लिए जीते मरते हैं
धन दौलत का अभिमान बुराई फैलाता
अच्छाई से कोसों दूर ले जाता
अभिमान भी कभी दुश्मन बन जाता है
रावण जैसे विद्वान से छल कर जाता
पांचाली के अभिमान ने उसे बचाया
श्री कृष्ण ने तभी उस पर वस्त्र ओढा़या
मैया सीता के अभिमान ने
रावण को रण में हराया था ।
श्री राम तभी तो
महाबलशाली रावण को मार पाया था ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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