नमन मंच 🙏🙏🙏
गूंज क़लम की
विषय - मित्रता
विधा - संस्मरण
बात आज से 25 साल पहले की है ।मै रोहित तब कक्षा चौथी में पढ़ते थे हम दोनों में बहुत ही प्यार था। हम एक दूसरे के बिना एक क्षण भी नहीं रह सकते थे। दोनों साथ मिलकर मैदान में खेलने जाते थे । खाने पीने की वस्तुएँ एक दूसरे से बांटकर खाते थे।
एक दिन रोहित विद्यालय में रंगीन पुस्तक लेकर आया ,पुस्तक देखने में बहुत आकर्षित थी। मैंने पुस्तक भी पुस्तक को देखा मुझे पुस्तक बहुत ही सुंदर लगी । पुस्तक में हिंदू देवी देवताओं की तस्वीरें और उनकी कहानी थी । मैंने भी अर्ध अवकाश में पुस्तक में से कुछ कहानियों को पढ़ा, बाद में पुस्तक को रोहित को लौटा दिया ।
रोहित मेरे दिल की बात को बिना बताये है जान लेता था । उसने घर जाकर अपनी गुल्लक को तोड़ दिया और अपने पापा से उसी तरह की पुस्तक लाना के लिए बोल दिया। उसके पापा शाम को पुस्तक लेकर आ गए रोहित सुबह होने का इंतजार बेसब्री कर रहा था।
सुबह होते ही रोहित मेरे पास आया ,मुझे अपने स्कूल बैग में से पुस्तक निकलाकर दी । मैंने बोला तुम्हे भूल नहीं पढनी क्या यह पुस्तक कहने लगा यार मेरे ऐसी दो पुस्तके है । इसलिए एक तुम्हारे लिए एक लेकर आया हूँ। मेरे हाथ में पुस्तक देखकर वह बहुत प्रसन्न हो रहा था । उसके बड़े भाई ने मुझे बता दिया था कि तुम्हारे लिए नई पुस्तक खरीद कर देने के लिए, रोहित ने अपनी गुल्लक को तोड़ दिया था ।
आज रोहित बेशक संसार से जा चुका है लेकिन उसकी निस्वार्थ मित्रता की यादें मेरी आँखों में पानी भर देती है । उसकी कमी मुझे जीवन में हमेशा खलती रहेगी । उसके जैसा निस्वार्थ मित्र मिल पाना आज के जमाने में बहुत असंभव सा लगता है । जो बिना बोले ही अपने मित्र के मन की बात जान लेता है ,और एहसान जताए बिना अपने दोस्त की जरूरत को भी पूरा कर देता है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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