नमन मंच 🙏🙏🙏
# गूंज क़लम की कटिहार इकाई
दिनांक - 31जुलाई, 2021
दिन - शनिवार
#विषय - सावन आया झूमकर
विधा - स्वैच्छिक ( छंदमुक्त कविता)
सावन आया झूमकर ठंडी ठंडी फुहार लाया ,
चारों ओर हरियाली की बहार लाया,
बबीहा अपनी प्यास बुझा पाता ,
नित्य सावन के आने की खुशी मानता है,
बारिश की हर एक बूंद आस बन जाती ,
किसान के खेतों की पैदावार बढ़ाती ,
नव दुल्हन सावन का इंतजार बेसब्री से करती ,
विवाह का पहल सावन सखी सहेलियों के संग बिताती,
सावन में सखियों संग झूला झूलकर,
अपने नव जीवन के सपने सजाती,
सावन में प्रिय के बिना नहीं रहा जाता,
पल पल बिरहा सर्प सा डंसता जाता,
सावन बिना पिया के बिल्कुल नहीं सुहाता,
पल भर भी पिया से दूर रहना हृदय की व्याकुलता बढ़ाता,
सावन की हर बूंद नव जीवन दे जाती,
सूखे, निष्प्राण, निष्प्रभावी जीवन में खुशहाली बढ़ाती ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें