सादर नमन मंच 🙏🙏🙏🙏
साहित्य सृजन संस्थान
सृजन के सारथी
समारोह क्रमांक-48
विषय- संत कविश्रेष्ठ तुलसीदास
राजापुर की धरती पर 1511 में तुलसी ने लिया अवतार,
पिता आत्मराम दुबे, माता हुलसी की होनहार संतान ।
गंडमूल पैदा होने के कारण माता दिया त्याग
जीवन में झेलनी पड़ी मुसीबतें कई हजार ।
गुरु नरहरिदास से पाया वेद शास्त्रों का ज्ञान पाया,
पत्नी के मोह में ईश्वर याद न आया।
रत्नावली की फटकार ने विरक्त बनाया,
तुलसीदास जी ने सारा जीवन श्रीराम की सेवा को कमाया।
रामचरितमानस ग्रंथ में भगवान राम की महिमा किया बखान,
कण कण में दिखा दिया श्री राम का नाम ।
दोहावली कवितावली, गीतावली, विनय पत्रिका आदि अनेक ग्रंथ यही रचियता,
वाणी इनकी सुनकर मन होता है पुनीता।
1623 में तुलसी जी ने छोड़ा दिया संसार,
रामनाम की महिमा से पहुँच गए हरि के द्वार।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू ,जम्मू कश्मीर
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