विषय- शिव
विधा - कविता
जय भोले भंडारी, तेरी महिमा गाती दुनिया सारी,
करते नंदी की सवारी, लगती सबको प्यारी ।
गले में बासुकी की माला, बनाती रूप तुम्हारा निराला,
आस ले कर तेरे द्वार आता, हमेशा झोली भरकर जाता ।
माता पार्वती से विवाह रचाया, कैलाश पर्वत को अपना घर है बनाया, कार्तिकेय गणेश पुत्र तुम्हारे, दोनों ने अनेक दुष्ट हैं मारे ।
हे महेश तुम स्वभाव से भोले वाले,खोलते हो बंद किस्मत के ताले, बेलपत्र चढ़ाने से खुश हो जाते,अपने भक्तों के सोये भाग जगाते ।
देवों के देव महादेव कहलाते, सभी देव तुमसे ही शक्ति पाते,
सारा ब्रह्माण्ड तूने रचाया, तूं कण कण में समाया।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
सांबा, जम्मू कश्मीर
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