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शुक्रवार, 23 जुलाई 2021

महादेव


विषय- शिव
विधा - कविता


जय भोले भंडारी, तेरी महिमा गाती दुनिया सारी, 

करते नंदी की सवारी, लगती सबको प्यारी । 


 गले में बासुकी की माला, बनाती रूप तुम्हारा निराला, 

आस ले कर तेरे द्वार आता, हमेशा झोली भरकर जाता । 


माता पार्वती से विवाह रचाया, कैलाश पर्वत को अपना घर है बनाया, कार्तिकेय गणेश पुत्र तुम्हारे, दोनों ने अनेक दुष्ट हैं मारे ।


हे महेश तुम स्वभाव से भोले वाले,खोलते हो बंद किस्मत के ताले, बेलपत्र चढ़ाने से  खुश हो जाते,अपने भक्तों के सोये भाग जगाते । 


देवों के देव महादेव कहलाते, सभी देव तुमसे ही शक्ति पाते, 

सारा ब्रह्माण्ड तूने रचाया, तूं कण कण में समाया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर





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