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रविवार, 25 जुलाई 2021

जीना जरूरी या जिंदा रहना

 नमन मंच 🙏🙏🙏

ग्वालियर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच

दिनांक - 31/06/2021

दिन- शनिवार

विषय - स्वतंत्र

शीर्षक  - जीना जरूरी या जिंदा रहना

विधा - लघुकथा

स्नेहा और रजनी दोनों काफी अच्छी सहेलियाँ थी। दोनों एक ही गाँव में रहती थी। दोनों के विचार जीवन के बारे में अलग अलग थे । दोनों को पढाई के बाद सरकारी अस्पताल में नर्स की नौकरी मिल गई । 

स्नेहा अपनी डयूटी पूरे कर्तव्य से निभाती थी। लेकिन रजनी सिर्फ वेतन के लिए अपना कर्तव्य निभाती थी। एक दिन स्नेहा और रजनी अपनी डयूटी से छुट्टी करने के बाद घर जाने ही लगी। तभी अचानक दर्द से तड़पता  एक लड़का अपने परिवार के साथ अस्पताल के अंदर आ गया। स्नेहा ने अपना बैग एक तरफ रखा लड़के का ईलाज करना शुरू कर दिया, लेकिन रजनी नहीं रूकी वह घर चली गई। 

एक दो घंटे के बाद डॉक्टर साहब भी आ गया । इन दोनों ने मिलकर लड़के का अच्छी तरह से ईलाज किया। लड़के का दर्द कम हो गया । डॉक्टर ने स्नेहा की पीठ थपथपाई और उसके प्रमोशन के लिए प्रमोशन पत्र आगे बड़े अधिकारियों को भेज दिया । डॉक्टर साहब स्नेहा की कर्तव्य पालन की भावना से बहुत ज्यादा प्रभावित हुए। 

दूसरे दिन स्नेहा ने रजनी को समझाए कि हमें सिर्फ अपने लिए ही नहीं जीना चाहिए, बल्कि दूसरे की नज़र में हमेशा जिंदा रहने के लिए अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानकर उसका पालन करना चाहिए । ताकि हमारा जीवन दूसरे के काम आ सके हमारा जीवन आदर्श मानव जीवन कह ला सके न कि हम पशु की तरह अपने लिए ही जीते रहे । रजनी के ऊपर स्नेहा की बातों का बहुत गहरा असर हुआ । अब रजनी भी अपने कर्तव्यों का दिल से पालन करने लगी  । 


स्वरचित एवं मौलिक 

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर



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