नमन मंच 🙏🙏🙏
#नव साहित्य परिवार
दिनांक - 27 - 29/07/2021
दिन- मंगलवार से गुरुवार
#विषय - कैसे दिन दिखाए
विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता)
कोरोना ने सबको रुलाया,
कईयों ने अपनों को गंवाया,
कैसे भयानक दिन कोरोना ने दिखाएं,
अपने ही बन गए पराये,
हर कोई अपने प्राण बचाता,
एक दूसरे से दूरी बनाता,
इंसानियत को किया शर्मसार,
कोई नहीं समझता दुख दर्द आज,
भूखे प्यासे सब रो रहे हैं,
अपने जीवन को खो रहे है,
बेरोजगारी बन गई समस्या भारी,
सबकी जेब अब खाली है,
गरीबी को इसने और बढ़ाया ,
गरीबों को भूख ने बहुत रुलाया,
कोरोना का भय सबको डराता,
हर कोई अपना कर्तव्य भुलाता ,
हमदर्दी ना रही किसी को न किसी से,
कैसे दिन कोरोना ने दिखाए,
सब ओर गम ही गम नज़र आता,
खुशी का संदेश कोई नहीं सुनाता ,
हे ईश्वर कैसा भयानक समय यह आया,
इंसान ने मानवता के गुणों को भुलाया ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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