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गुरुवार, 1 जुलाई 2021

गलत/बुरी जो है परंपरा, अवसान होना चाहिए

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

दिनांक - 01/07/2021

दिन- गुरुवार

#विषय - गलत/बुरी जो परंपरा है, अवसान होना चाहिए

विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता


बुरी परंपरा जो समाज को नुकसान पहुंचाये, 

इंसान को इंसानियत भुलाये, 

जातिवाद ने कोहराम मचाया, 

मानवों में ऊंच नीच का भेद है बनाया, 

संत, महापुरुषों ने इस परंपरा के खिलाफ आवाज़ है उठाई, 

वाहियात परंपरा खत्म करने की कसम उन्होंने खाई, 

दहेज प्रथा ने नारी के सम्मान को घटाया, 

नारी को जीवन को बहुत मुश्किल है बनाया, 

दहेज प्रथा को खत्म करने का बेड़ा उठाया, 

संविधान में दहेज मांगने वाले के लिए दंड का प्रावधान बनाया, 

जन्म, मरण, विवाह के अवसर पर ऐसी रस्में बनाई, 

गरीब को और गरीब बनाने की नई रस्में आई, 

ऐसी परंपराएं जो समाज को कमजोर बनाएं, 

मानव को मानव से दूर ले जाए, 

समाज की उन्नति में रोडे़  अटकाए, 

ऐसी को परंपराओं को जड़ से खत्म होना चाहिए । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर


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