शीर्षक - जन्मदिन
विधा - लघुकथा
कुसंगति और माँ बाप जयादा का प्यार बच्चे को बिगाड़ देता है। बच्चे की गलती को कभी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि बच्चे को थोड़ा डांटकर और थोडे़ प्यार से समझाना चाहिए, ताकि वे दुबारा ऐसी गलती न करें।
विनोद अपने माँ बाप का इकलौता पुत्र है, लेकिन माँ बाप के प्यार से उसे बिगाड़ दिया। समय के साथ उसकी आदतें बिगड़ने लगी । कुसंगति में पड़कर नशा करने लगा माँ बाप की इज़्ज़त करना भी भूल गया ।
माँ बाप ने सोचा अगर हम इसकी शादी अच्छी लड़की से कर देते है । शायद इसके स्वभाव में कोई परिवर्तन आ जाए । विनोद की शादी अच्छे परिवार में हो गई । विनोद की पत्नी भारती बहुत संस्कारी , सुशील और धार्मिक प्रवृत्ति की लड़की थी ।
भारती नित्य मंदिर जाती और घर में सुबह शाम भगवद्गीता और रामायण पाठ करती । एक दिन विनोद बहुत बीमार हो गया लगता था ,अभी प्राण छोड़ जाएगा । भारती ने दिन रात विनोद की सेवा की। कुछ दिनों में वो स्वस्थ हो गया । भारती की संगति ने उसे भी संस्कारी बना दिया उसने भी नित्य मंदिर जाना शुरू किया ।
अपने माँ बाप से विनोद ने कहा कि मैं अपना जन्मदिन मानना चाहता हूँ । उसके माँ बाप हैरान हो गए ,और कहने लगे बेटा तुम्हारा जन्मदिन तो तीन महीने पहले हो चुके हैं । वो बोला माँ मुझे लगता है कि मेरा जन्म आज ही हुआ, क्योंकि मुझे आज ही अपनी गलतियों का अहसास है और मैने खुशियों और प्यार से भरे जीवन में प्रवेश किया है मेरे लिए आज का दिन ही नव जीवन की शुरुआत हैं और मेरा जन्मदिन है ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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