नमन मंच 🙏🙏🙏
#कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत
दिनांक - 04/07/2021
दिन- रविवार
#विषय - भ्रूणहत्या रोकें हम सब
विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता
औरत को देना है पूरा सम्मान ,
उसकी भी है अपनी पहचान,
मकान को घर बनाने का करती है काम,
घर को संवारने के लिए भूल जाती करना विश्राम,
बेटी बनकर माँ बाप का मान बढ़ाती,
सबको प्रेम प्यार से बुलाती,
बाप की वो पगड़ी कहलाती,
उसकी इज़्ज़त हमेशा बढ़ाती,
माँ का हर काम में हाथ बंटाती ,
कभी किसी काम से जी न चुराती,
माँ बाप बेटी को बहुत करती प्यार,
उनको खुश करने के करती है यत्न हज़ार,
पराया घर में भी जाकर सबको वो अपनाती,
अपना हर फर्ज खुशी खुशी निभाती है,
बच्चों को जन्म देकर वंश रेखा आगे बढ़ाती,
बच्चों को अच्छे संस्कार देकर अच्छा इंसान बनाती,
तो भी वो कोख में ही मार दी जाती,
औरत ही तो परिवार को आगे बढ़ाती,
भ्रूणहत्या रोकने का सब करें प्रयास,
तभी होगा औरत के साथ इंसाफ़,
औरत के लिए अपनी सोच को बदलना होगा,
औरत को जन्म लेने का अधिकार देने के लिए लड़ना होगा ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें