#विषय - जब मानव प्रजापति एक, तो जातियाँ क्यों अनेक
इंसान को ईश्वर का सृजन कहा जाता,
सब योनियों में श्रेष्ठ कहलाता,
ऊपर वाला तो इंसान बनाता,
जात का भ्रम कौन फैलाता,
सब धर्म मानव को ईश्वर की संतान बताते,
जात पात का भेद कौन बनाते,
जात पात के नाम नफरत फैलाई जाती,
आपस में लड़ते भाई भाई,
जात के नाम पर वोट मांगें जाते,
अयोग्य उम्मीदवार को लोग जीतते,
जात के नाम पर लोकतंत्र हार जाता,
विकास का पहिया रूक ही जाता,
कोई इस बात को समझ नहीं पाता,
जात पात के चक्र में भाईचारा खत्म हो जाता,
जात पात का कोई फायदा समझ नहीं आता,
क्यों नासमझ इंसान जात पात के नाम पर अपनी एकता गंवाता,
समाज के ठेकेदारों ने यह भेद बनाया,
जाति के नाम पर लोगों को आपस में लड़वाया,
उनको नहीं किसी से कोई वास्ता,
सिर्फ यह कुर्सी पाने का रास्ता,
अपनी मान प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए जात का कुआँ खुलवाते,
नासमझ लोग उसमें गिरते जाते हैं,
कुदरत ने कोई भेद भाव न किसी से अपनाया,
जात पात का भेद कुछ लोगों ने अपने फायदे के लिए बनाया है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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