नमन मंच 🙏🙏🙏
# साहित्यिक महफ़िल परिवार
दिनांक - 11/07/2021
दिन- रविवार
#विषय - आंसू/अश्क
विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता)
आंसू भी इंसान होने की पहचान रखते,
दूसरे के गम को देखकर बह चलते,
इनका बहना मन को पवित्र कर जाता,
एक दूसरे के लिए प्यार जगाता,
गम हो जा खुशी आंसू निकल आते ,
अपनी भावनाओं को छुपा नहीं पाते हैं,
जब कोई बिछुड़ा सज्जन मिल जाता,
कोई न इनको रोक पाता,
आंसुओ को सिर्फ बहना ही आता ,
भावनाओं को कोई दिलवाला ही समझ पाता,
आंसुओं की कीमत का कोई मोल नहीं,
दिलवालों के लिए बहुत ही अनमोल है,
आंसुओं को व्यर्थ में नहीं बहाना,
इसकी कीमत बारे में सबको बताना हैं ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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