नमन मंच 🙏🙏🙏
#कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत
दिनांक - 10/07/2021
दिन- शनिवार
#विषय - समय की कीमत
विधा - स्वैच्छिक - छंदमुक्त कविता
समय हमेशा आगे बढ़ता,
नासमझ इंसान इसकी गति समझ नहीं पाता,
बीता हुआ समय वापिस नहीं आता,
समय बीतने पर बहुत पछताता,
समय की कीमत को मानव पहचान,
तभी मिलेगा जग में मान,
समय रहते जिसने अपना कारज कर लिया,
अपना जीवन उसने सफल कर लिया,
आज कल पर जो काम लटकाता,
समय बीतने पर सदा पछताता ,
आलसी मनुष्य समय व्यर्थ गंवाता,
अपना जीवन नर्क बनाता,
हर किसी को समय का मोल समझ नहीं आता,
पूरा जीवन रहता पछताता,
समय की कीमत को जिसने समझ लिया,
उसने ही अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें