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मंगलवार, 20 जुलाई 2021

मन

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#साहित्यिक महफ़िल परिवार

दिनांक - 21/07/2021 

दिन- बुधवार

#विषय - मन

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 


मन मेरे टेक ले हरिनाम की, 

तब मिले तुझे विश्राम, 

हरिनाम से ऊपर कुछ कर्म नहीं, 

झूठा सब माया पसारा, 

कोई अपना पराया नहीं, 

सब हरि की संतान , 

तेरे मेरे का छोड़ दे जंजाल, 

मन बन जा हरि चरणन दास रे, 

कण कण सृष्टि का करता हरिनाम का जाप रे, 

तूं क्यों नहीं सुनता बहरे अंजान रे, 

डोलते मन का हरिनाम सहारा, 

बिना हरिनाम के होता ना भवसागर पार रे, 

मन रे हरिनाम को हृदय में बसा ले, 

भवसागर में तेरा बेड़ा क्षण में हो जाएगा पार रे । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर


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