नमन मंच 🙏🙏🙏
काव्य प्रभा अखिल भारतीय साहित्यिक मंच
दिनांक- 20/7/2021
क्रमांक-03
विषय- मेरे हो तुम
मेरे सतगुरु जी मेहर करो जी,
मन की दुविधा का नाश करो,
मेरे हो तुम सखा मीत,
तुम हो मेरे दिल के करीब,
हर मुश्किल क्षण में हल हो जाती,
तेरी कृपा मन से अज्ञान मिटाती,
मन को हमेशा डोलने से बचाते,
मन के सारे विकार मिटाते,
तेरे नाम की मन में भूख लग जाए ,
मन के सारे भ्रम मिटाए,
तेरे दरस से मनुष्य जन्म सफल हो जाए,
तन मन में खुशी भर जाए,
तेरी सेवा जो हर पल कमाता,
तन मन में तेरा नाम समाता,
तेरी रहमत भवसागर पार कराती,
मानव जीवन को सफल बनाती ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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