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#समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत
दिनांक - 21/07/2021
दिन - बुधवार
विषय - समाज और साहित्य
विधा - आलेख
साहित्य समाज का दर्पण का होता है । समाज में जैसा साहित्य पढ़ा जाता है वैसा ही उनका रहन -सहन, संस्कार, संस्कृति होगी । साहित्य का प्रभाव मानव के मन पर गहरा पड़ता है और उसके नित्य के कार्यों से यह प्रभाव साफ -साफ दिखाई देगा।
हमारे संतों, महापुरुष ने साहित्य के माध्यम से ही समाज में जागृति लाई ,और सदियों से चली आ रही मानव विरोधी परंपराओं का खंडन किया ऐसी परंपराओं का खंडन किया जो मानव एकता की दुश्मन थी। जिसके कारण समाज जाति के नाम पर बंट गया था। उन्होंने साहित्य के माध्यम से इन परंपराओं का समूल नाश किया। साहित्य ही समाज को जागृत कर सकता है और मानव के विचारों में परिवर्तन ला सकता है।
आजादी से पहले हमारा समाज जातियों और धर्मों में बंट चुका था। जिसका फायदा अंग्रेजी सरकार ले रही थी । फिर हमारे साहित्यकारों ने साहित्य के माध्यम से सब में देशभक्ति की भावना जागृत की सब को एक साथ आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार किया। तभी तो हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हो सका।
क़लम की ताक़त सबसे बड़ी मानी जाती है जो मुर्दा इंसान में भी जोश भर देती है। साहित्य ही हमारी संस्कृति और संस्कारों को अपने अंदर समेट कर रखता है। पीढ़ी दर पीढ़ी आगे पहुंचाता है । साहित्य और समाज का बहुत गहरा रिश्ता है इन दोनों को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। समाज साहित्य पर अपना प्रभाव छोड़ता है और साहित्य अपना प्रभाव समाज पर छोड़ता है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू , जम्मू कश्मीर
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