फ़ॉलोअर

शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

हृदयस्पन्दन

 नमन मंच 🙏🙏🙏

#हिंददेश परिवार जम्मू कश्मीर इकाई

दिनांक - 03/07/2021

दिन- शनिवार

#विषय - हृदयस्पन्दन ( दिल की धड़कन) 

विधा - स्वैच्छिक (छंदमुक्त कविता) 

श्वास श्वास सिमरन तेरा करता जाऊँ, 

हे स्वामी हर श्वास तुम्हारी कृपा से लेता हूँ, 

तेरी कृपा से मानुष देही पाई, 

तूं ही बाप तूं ही मेरी माई, 

तेरे परोपकार को कैसे भूल जाऊँ, 

तेरी कृपा से ही जीवन पाऊँ, 

शरीर के रोम रोम में तेरा नाम बस जाए, 

यही मेरे जीवन का उद्देश्य बन जाए, 

हृदयस्पन्दन के महत्व को पहचानना बहुत जरूरी, 

इससे ही होगी मानव जीवन के उद्देश्य की पूर्ति । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू  , जम्मू कश्मीर





कोई टिप्पणी नहीं:

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...