नमन मंच🙏🙏🙏 🌹🌼🌻🌺🌸💐
#नव साहित्य परिवार
दिनांक - 30-31/07/2021
दिन - शुक्रवार से शनिवार
विषय - संदेह
विधा - छंदमुक्त कविता
संदेह रिश्तों की बुनियाद हिलाता,
दिलों में नफरत भरता जाता,
संदेह आपस में विश्वास की भावना घटाता,
रिश्तों में दूरियाँ बढ़ाता,
संदेह करने से रिश्ते बिगड़ते जाते,
टूटने की कगार पर आ जाते ,
संदेह की भावना से परिवार बिखर जाता,
हर रिश्ता पराया - सा बनता जाता,
संदेह की परत हृदय से जैसे हटती जाती,
हर गलती का एहसास कराती,
संदेह की जगह रिश्तों में विश्वास बनाना है,
हर मुश्किल में एक दूसरे का साथ निभाना है।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू,जम्मू कश्मीर
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