#पावस ॠतु
साजन अब घर लौट आना
मोहे अब बिरहा में मत जलाना
साजन अब घर लौट आना ..................
सावन की बरसात में मेरे नयन की प्यास बुझाना
मेरे हृदय में सदा के लिए बस जाना
साजन अब घर लौट आना ..................
मेरा तेरे बिना नहीं कोई ठिकाना
मेरे भावों की तूँ ही कीमत लगाना
साजन अब घर लौट आना ..................
साजन मेरी जन्मों जन्मों की प्यास बुझाना
प्रेम रस मेरे रोम रोम में भर जाना
साजन अब घर लौट आना ..................
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू-कश्मीर
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