#संत कबीर साहेब महिमा
राम कबीरा एक है सच लिया यह जान
सब में एक ही रम रहा सबने लिया पहचान।
भजन बंदगी ही जीवन का एक मात्र उद्देश्य
जात पात सब भ्रमजाल है यह कबीर का उपदेश।
कर्म-काण्ड का तन मन से करे त्याग
कहे कबीर मूर्ख मानव अब तो गहरी नींद से जाग।
ऊँच नीच का भेद सब है जग का धंधा
सब में एक ज्योति को देखा पाता कबीर वो नर अक्ल का अंधा।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
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