शीर्षक - प्रभु प्रेम का सागर है
प्रभु प्रेम का सागर है
तेरा साथ मेरा जन्मों का नाता है
तेरा मेरा रिश्ता जगत में निराला है
प्रभु प्रेम का सागर है.............
माता के गर्भ में तूं ही रक्षा करता है
मेरे सब दुख तूं ही हरता है
प्रभु प्रेम का सागर है...............
मेरी हर ग़लती को नजरंदाज करता है
जीवन में सुधरने का हर मौका तूं ही देता है
प्रभु प्रेम का सागर है...............
जब मैं हिम्मत हार जाता हूं
दिलासा तूं ही देता है
प्रभु प्रेम का सागर है..............
प्रभु मुझे भी प्रेम करना सीखा देता
मुझ पापी को अपने में मिला लेता
प्रभु प्रेम का सागर है..............
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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