शीर्षक : हम डगर के दो मुसाफिर
हर मुश्किल में साथ निभाना
कभी अकेला छोड़कर मत जाना
हर ग़म में भी मुस्काना
हम डगर के दो मुसाफिर।।
सात जन्मों का हमारा नाता
हर पल को खुशी खुशी से जीना चाहता
एक दूसरे के दिल की बात हमेशा समझ जाते
हम डगर के दो मुसाफिर।।
तेरा साथ मेरी हिम्मत बढ़ाता
हर मुश्किल से मैं लड़ जाता
तेरी तारीफ के गीत मेरा दिल है गाता
हम डगर के दो मुसाफिर।।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर
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