शीर्षक - कुछ तुम बदलो, कुछ हम बदलें
मिलकर जीवन की मुश्किलों को सुलझाते है
एक दूसरे के साथ होने का एहसास कराते हैं
मेरे मनमीत हंसते हंसते जीवन बिताते हैं
कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलें.........
घर का कोना कोना प्रेम प्यार से महकाते हैं
नफ़रत को दिल के आंगन से हटाते हैं
प्रेम का फूल हृदय में खिलाते हैं
कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलें............
मन से गिले शिकवों को भूलाते है
एक दूसरे की भावनाओं को समझते समझाते हैं
जिंदगी भर एक दूसरे का सुख दुख में साथ निभाते हैं
कुछ तुम बदलो कुछ हम बदलें..........
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर
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