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शनिवार, 14 मई 2022

ईश्वर

 शीर्षक - ईश्वर 

हे सर्वेश्वर , हे जगतेश्वर  , हे कालेश्वर 

तेरे पावन चरणों में करूं नमस्कार 

भवसागर से मेरा कर‌ दे बेड़ा पार।

हे दीनानाथ, हे दीनबंधु, हे दुखहर्ता 

ये संसार तेरी माया, मोह माया में मैंने तुझे भुलाया

मन में कैसा अंधकार छाया, माया जाल में खुद को उलझाया।

हे कृपानिधि, हे करूणानिधान,हे कृपानाथ

मुझे अपने नाम कर दो‌ दान 

आठों पहर जपता रहूं तेरा नाम 

हे दयानिधान,हे दयासागर , हे दयानिधि 

मेरे समस्त पापों करो नाश 

हृदय में दिखा दो अपना प्रकाश

हे पापनाशक, हे अवगुणखंडन , हे गुणीनिधान 

कण कण में अपना रूप दिखाओ 

मन पर पड़ा माया का  जाल हटाओ।



स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

सांबा, जम्मू कश्मीर






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