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बुधवार, 9 फ़रवरी 2022

कर्मों का लेखा जोखा

 शीर्षक - कर्मों का लेखा जोखा 

कर्मों का लेखा जोखा जीवन के अंत में होना है

नासमझ इंसान तूने अपने बुरे  कर्मों याद कर रोना है 

क्या मुख लेकर ईश्वर के द्वार जाएगा 

 बुरे कर्मों का भार तुझ से उठाया न जाएगा 

दया भाव तुझे देवता बनाएगा 

ईश्वर के द्वार पर सम्मान बहुत पाएगा 

भूखे प्यासे की सेवा तेरे काम आएगी 

लोक परलोक में तेरा मान सम्मान बढ़ाएगी

जात पात का भ्रम ईश्वर से दूर ले जायेगा 

अपने हृदय में परमात्मा का दर्शन कैसे पायेगा 

साधु संगति बिना कैसे जीवन की सच्चाई जान पाएगा

झूठी माया में फंसकर अमूल्य जीवन व्यर्थ गंवायेगा।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह 

सांबा , जम्मू कश्मीर










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