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शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2022

हृदय का बसंत

 नमन मंच

शीर्षक - हृदय का बसंत 

सतगुरू मेरे हृदय का बसंत सदाबहार बन‌ जाए 

कोटि पतझड़ आने पर भी न मुर्झाए 

दया भाव का फूल  सदा खिल खिलाए

जात पात धर्म का भेद मेरे हृदय में न आए।

 हवा की तरह हर जगह जाऊं

फूलों की खुशबू जैसे सबकी सांसों में समाऊं 

कण कण में बसने वाले भगवान का दर्शन हृदय में पाऊं

अपने शुभ गुणों से बसंत ऋतु जैसी बहार संसार में लाऊं।


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर



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