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रविवार, 13 फ़रवरी 2022

अमूल्य जीवन

 शीर्षक - अमूल्य जीवन 

हीरे जैसा अनमोल यह जीवन, क्यों व्यर्थ गंवाता है

अवसर बीत जाने पर हाथ मलता रह जाता है

रात दिन झूठ जो तूं कमाता है 

दुख दर्द से क्यों घबराता है 

बुरे कर्मों का फल बुरा ही होता हैं

 यही  विधान विधाता बनाता है

काम ,क्रोध ,लोभ के जाल में फंसा मन ईश्वर से दूर होता जाता

अंत काल में बहुत पछताता है 

शरीर के रस तुझे बहुत भाते हैं

ये रस पगले तेरी दूरी प्रभु स्वामी से बढ़ाते है 

बुरी संगति नादान नरक ले जाती है

अशुभ गुणों की पटोली यमदूतों से दंड दिलवाती है 

नरक की घोर सज़ाए न झेली जाती है

अमूल्य मानस जन्म को व्यर्थ खोने की यादें तब बहुत रुलाती है।

स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जिला - सांबा , जम्मू कश्मीर










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