शीर्षक - फ़रियाद
मेरे साइयां तेरे दर पर खड़ा फ़रियाद करता हूं
मिट जाए मेरा अहम भाव यही अरदास करता हूं
दर पड़ हुए रख लें लाज यही फ़रियाद करता हूं
विकारों में फंसे मन को सतसंगति का सहारा दें
यही मांग करता हूं तूं बन जा डोलते मन का सहारा
यही फ़रियाद मेरे सतगुरु तेरे से आठों पहर करता हूं
कुसंग से मुझे बचा ले अपने नाम की रंगत चढ़ा दें
अपनी याद को मेरे हृदय में बसा दें यही फ़रियाद करता हूं
मोह माया का भ्रम मिटा दें मेरे हृदय में नाम की ज्योति जगा दे
अपना मेरे घट में दर्शन करा दे यही फ़रियाद दिन रात करता हूं।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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