शीर्षक - तूं ही मेरा सहारा
ओ सृष्टि कर्ता ,दुख हरता सब मनोरथ पूर्ण करने वाले
सतगुरु परमेश्वर तूं ही मेरा सहारा
तूं लगता मुझ को सबसे प्यारा है
ओ सृष्टि कर्ता ,दुख हरता........ ... ...........
घट घट में बसने वाले हर दिल की जाने वाले
हमारा रिश्ता तेरे से सबसे निराला
तेरे हुक्म में चलता ब्रह्मांड सारा है
ओ सृष्टि कर्ता ,दुख हरता........ ... ...........
तेरे खेल में खेलता जग सारा
प्रेम रंग में रंगा गीत गाता
तूं ही तो सिरजनहार हमारा
ओ सृष्टि कर्ता ,दुख हरता...........................
सारे आश्रय खत्म होने पर
सब ओर से धक्के पड़ने पर
एकमात्र बनता सबका तूं ही सहारा
ओ सृष्टि कर्ता ,दुख हरता........ ... ...........
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला: सांबा , जम्मू कश्मीर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें