शीर्षक - मन को भी जीत ले
जग जीतने को चला रे
मन को भी जीत ले
जग जीतने को.........
जो विषय विकारों में फंसा रे
उस मनचले को सतगुरु की सीख दे
जग जीतने को ..........…
सत्संग में प्रभु प्रेम के गीत गा ले
अपने मन को सतसंगति का रंग लगा रे
जग जीतने को..........
मन पक्षी को सही दिशा में जाना सीखा दे
मन के सब भ्रम सत्संग में मिटा ले
जग जीतने को..............
दुनिया के खेल तमाशे को समझ रे
मायाजाल से मन को निकाल लें
जग जीतने को.........…....
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जिला - सांबा, जम्मू कश्मीर
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