फ़ॉलोअर

गुरुवार, 15 अप्रैल 2021

कूष्माण्डा

# नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य संगम संस्थान जम्मू कश्मीर  इकाई

# दिनांक - 16/04/2021
# दिन - शुक्रवार
# विषय - माँ  कूष्माण्डा
# विधा - स्वैच्छिक


जय माँ  कूष्माण्डा, जय माँ कूष्माण्डा,
मेरी एक विनती सुनो,
भवसागर से मेरा बेड़ा पार करो,
इस संसार में तेरा ही सहारा माँ ,
अष्ट भुजाओं वाली ,
तूं ही अष्टभुजा कहलाती,
सिंह पर विराजित होकर
सब पापियों का नाश करती

तेरी हल्की सी मुस्कान ने ही,
ब्रह्मंड सृजन किया,
तेरे हाथों में रिद्धियां सिद्धियाँ निधियाँ
भक्त मन वांछित फल पाता,
तेरी कृपा से माँ,
लोक परलोक संवर जाता,
जय माँ कूष्माण्डा, जय माँ कूष्माण्डा ।

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू कश्मीर, जम्मू


कोई टिप्पणी नहीं:

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...