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शुक्रवार, 16 अप्रैल 2021

लॉकडाउन

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# साहित्य बोध

# दिनांक - 08/05/2021

# दिन - शनिवार

# विषय - लॉकडाउन

# विधा - संस्मरण

22 मार्च 2020 का दिन कभी नहीं भूलता  ।जब पूरे भारत में लॉकडॉउन लग गया था । मै और मेरा मित्र पटना में थे सारी रेल रद्द हो गई थी। बसें भी चलना बंद हो गई हम दोनों पटना रेलवे स्टेशन में फंस गए थे। इस सोच पडे़ थे, घर कैसे पहुँचा जाए हमारे पास पैसे भी बहुत कम थे अगर पैसे ज्यादा होते तो कोई स्पैशल गाड़ी ही कर लेते, कोरोना के कारण सब वस्तुओं के मूल्य बढ़ गए थे ।
लोगों को कोरोना वायरस की अधूरी जानकारी  थी, लोग बहुत परेशान थे उनको लॉकडाउन और कर्फ्यू का अंतर पता नहीं था ।उनका यह भी पता नहीं था लॉकडाउन उनकी बेहतरी के लिए लगाया गया है। कोरोना वायरस से और लोग संकम्रित न हो ।
हम अपनी परेशानी लिये बैठे थे कि हम जम्मू कैसे पहुंचे तभी वहाँ एक सज्जन पुरुष आए मेरे से पूछने लगे आप परेशान क्यों हो ?मैंने बोला  श्रीमान, मैं और मेरा मित्र पटना घूमने आए थे, सरकार ने पूरे भारत देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया है । अब हमारे पास घर वापिस जाने का कोई साधन नहीं ,पैसे भी हमारे पास बहुत कम है। मैं अपनी बात कहकर चुप हो गया । वो सज्जन पुरुष हम दोनों से कहने लगे कि मैं भी जम्मू शहर से हूँ ,पटना घूमने आया था मैं अपनी गाड़ी साथ लेकर आया हूँ अगर आप मेरे साथ जम्मू जाने चाहते है तो मुझे अच्छे लगेगा और साथ में मुझे आपका साथ मिल जायेगा । हम दोनों तुरंत हां कर दी ,हमारी तो समस्या का समाधान हो गया।
मुझे आज भी वो दिन कभी नहीं भूलता  और   साथ मुझे संदेश मिला कि आज भी अच्छे इंसानों की कमी नहीं है ।

स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
  जम्मू, जम्मू कश्मीर


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