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बुधवार, 28 अप्रैल 2021

मजदूर

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत

# दिनांक - 13-15/05/2021

# दिन - बृहस्पतिवार - शनिवार

# विषय - मजदूर

# विधा - स्वैच्छिक


दिन रात मेहनत करता हूँ, 

फिर भी खाने के लिए तरसता हूँ, 

मेहनत  का पूरा धाम नहीं मिलता, 

मन की इच्छाओं को दबाकर जीता , 

सीमेंट से हाथ पैर फट जाते, 

एक गज भी चल नहीं पाता, 

असहाय होकर सारा जीवन बिताता, 

अपने बच्चों का भविष्य बना नहीं पाता , 

बड़े बड़े महलों को मै बनाता हूँ, 

अपने लिए झोपड़ी भी नहीं बना पाता, 

मजदूर हूँ मजबूर बना दिया, 

मेरी मेहनत का पैसा ,

बडे़ बड़े ठेकेदारों ने खा लिया। 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर








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