# नमन मंच 🙏🙏🙏
# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत
# दिनांक - 03/04/2021
# दिन - शनिवार
# विषय - सामाजिक न्याय
# विधा - छंदमुक्त कविता
सब ओर अन्याय का बोलबाला
पीसता वही है,
जो किस्मत का मारा है
न्याय के लिए,
गरीब गुहार लगता है
वकीलों की ,
फीस भर भर कर
ईमानदारी से कमाया पैसा,
व्यर्थ गंवाता है
न्याय मिलने पर ,
रोता चिल्लाता है
सामाजिक न्याय की रीढ़
सब सीधी होगी
जब न्याय करना ही
धर्म बन जाएगा
तब ही हर किसी को,
न्याय मिल पाएगा
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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