# नमन मंच 🙏🙏🙏
# समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान, भारत
# दिनांक - 29/04/2021
# दिन - बृहस्पतिवार
# विषय - किसान की मजबूरी
# विधा - स्वैच्छिक ( गद्य- लघुकथा)
भानू कुछ सोच में डूबा बैठा था तभी अचानक उसका पडोसी मानू आ गया, मानू ने भानू से पूछा ,भाई किस सोच में डूबे हो? क्या बात है ?मैं तुम्हें बहुत दिनों से देख रहा हूँ तुम कुछ परेशान से दिखाई दे रहे हो ,मुझे बताओ तुम्हारी परेशानी कारण क्या है?
भानू बोला भाई क्या बताऊँ शाह जी से बहुत सारा धन ब्याज पर ले लिया था, लेकिन अब धन वापिस कैसे करूँ खेतों से जो कमाई आती है उससे घर का निर्वाह करना भी मुश्किल हो रहा है। बेटियां भी जवान हो गई है उनके भी हाथ पीले करने है । अब शाह जी भी पैसे मांग रहे है और धमका रहे हैं कि अगर तुमने मेरे पैसे जल्दी नहीं लौटाया तो तुम्हारे खेतों पर कब्जा कर लूगां
इसी चिंता से कई दिनों से चैन से सो नहीं पाया। अगर सरकार हम किसानों को फसलों के उचित दाम दिलवा देती तो हमारी यह हालत न होती न ही कोई किसान कर्जदार होता न ही उसको आत्महत्या करने की आवश्यकता पड़ती । देश आजाद हो गया लेकिन किसान आज भी गुलामों जैसी जिंदगी व्यतीत कर रहा है अगर सरकार को किसानों के हालत सुधारने की चिंता होती तो फसलों के न्यूतम मूल्य तय न कर देते और आज हम किसान भी खुशहाली से जीवन जी रहे होते।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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