# विषय - वैसाखी
# विधा - स्वैच्छिक
वैसाखी के दिन ही,
दशमेश पिता ने खालसा पंथ सजाया।
एक पात्र से सब को अमृत पिलाकर,
जात पात का भ्रम मिटाया।
अपने ही शिष्यों से अमृत पीकर,
शिष्यों का मान बढ़ाया।
नारी को भी अमृत पिलाकर,
स्वयं के लिए लड़ना सिखाया।
सबको जुल्म के खिलाफ लड़ने का,
सतगुरु ने पाठ पढ़ाया।
वैसाखी का त्यौहार किसान के,
चेहरा पर प्रसन्नता लाता ।
फसल पकने का समय जब आता,
किसान की खुशी बढ़ाता।
अपनी मेहनत का जब फल पाता,
नाच गाकर अपनी खुशी जताता ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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