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# हिंददेश परिवार झारखंड इकाई
# दिनांक - 01/06/2021
# दिन - सोमवार
# विषय - चांद
# विधा - छंदमुक्त कविता
चांदनी रात में ,
बिरहा बहुत सताता,
पल पल पिया की,
याद दिलाता,
एक क्षण भी ,
प्रीतम बिन रहा नहीं जाता,
चौकर के जैसे चांद को निहारूँ,
पर मिल नहीं पाऊँ,
चांद की रोशनी सोने नहीं देती,
मुझे कहीं खोने नहीं देती,
कब पिया मिलन की, रात आएगी
मेरे मन तन की प्यास बुझायेगी ,
हर पल रोती बिलखती हूँ,
पिया मिलन के लिए तड़पती हूँ,
जब पिया पिया का ,
मुझसे मिलन हो होगा,
चांदनी रात का,
उस दिन अलग ही रंग होगा ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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