फ़ॉलोअर

सोमवार, 5 अप्रैल 2021

चांदनी रात

 # नमन मंच 🙏🙏🙏

# हिंददेश परिवार झारखंड इकाई

# दिनांक - 01/06/2021

# दिन - सोमवार

# विषय - चांद

# विधा - छंदमुक्त  कविता

चांदनी रात में ,

बिरहा बहुत सताता, 

पल पल पिया की, 

याद दिलाता, 

एक क्षण भी , 

प्रीतम बिन रहा नहीं जाता, 

चौकर के जैसे चांद को निहारूँ,

 पर मिल नहीं पाऊँ, 

चांद की रोशनी सोने नहीं देती,

 मुझे कहीं खोने नहीं देती, 

कब पिया मिलन की, रात आएगी

मेरे मन तन की प्यास बुझायेगी , 

हर पल रोती बिलखती हूँ,  

पिया मिलन के लिए तड़पती हूँ, 

जब पिया पिया का ,

मुझसे मिलन हो होगा, 

चांदनी रात का, 

उस दिन अलग ही रंग होगा । 


स्वरचित एवं मौलिक

अमरजीत सिंह

जम्मू, जम्मू कश्मीर




कोई टिप्पणी नहीं:

प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है

 शीर्षक: प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है प्रेम ही ईश्वर है ईश्वर ही प्रेम है सभी ग्रंथों का सार  सभी एक है परिवार  बना ले इसको जीवन का आ...