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# दिनांक - 27/04/2021
# दिन - मंगलवार
# विषय - मिट्टी
# विधा - गद्य - पद्य
बचपन में मिट्टी बहुत भाती ,
इससे कई खिलौने बनाता,
मिट्टी में खेलना बहुत सुहाता,
एक दूसरे पर मिट्टी फेकने का बहुत मजा आता,
मम्मी की बहुत डांट पड़ती ,
जब मिट्टी से पांवों भर जाते,
भरें हुए पांव जगह जगह लगाते,
मम्मी का गुस्सा और बढ़ाते,
मिट्टी की खूशबू मन में उल्लास भरती,
तन मन के सब दुख कलेश हरती,
पक्के फर्शों पर खेलने का कोई आनंद नहीं आता,
नीचे गिरने पर पक्का फर्श गहरी चोट पहुंचाता,
मिट्टी में खेलने के दिन वापिस आयेगें,
जीवन की वही खुशियाँ लौटेंगे ।
स्वरचित एवं मौलिक
अमरजीत सिंह
जम्मू, जम्मू कश्मीर
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